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innovative ideas सुधांशु गुप्त

लम्बे अरसे से कहानियां लिख रहा हूं कई कहानियांे पर पुरस्कार भी मिलें। ‘खाली कॉफी हाउस’ नाम से एक कहानी संग्रह प्रकाशित। इसके अलावा टेलीविजन और रेडियो के लिए नियमित रूप से धारावाहिक लेखन। फिलहाल एक उपन्यास लिख रहा हूं। साहित्य मेरे लिए खुद को दोबारा पाने का ही एक रास्ता है, और मैं इसी पर चलने की कोशिश कर रहा हूं। पिछले दस साल से दैनिक हिन्दुस्तान के संपादकीय विभाग में कार्यरत।

Wednesday, August 24, 2011

पत्रकारिता में चापलूसी के नए-नए आयाम देखे हैं मैंने : सुधांशु गुप्त

Posted by sudhanshu gupt at 6:18 AM No comments:
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